- टेंडर नवीनीकरण के नाम पर वसूली, काम से बैठाने की धमकी और बोनस नहीं मिलने का मुद्दा उठाया; रामा पांडे ने श्रम कानूनों के पालन की मांग की
Guwa (Sandeep Gupta) किरीबुरू और मेघाहातुबुरू लौह अयस्क खदानों में ठेका श्रमिकों के कथित शोषण, आर्थिक वसूली और श्रम कानूनों के उल्लंघन को लेकर झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने सेल प्रबंधन से वार्ता कर मामले का समाधान निकालने का निर्णय लिया है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने कहा कि ठेका श्रमिकों के साथ हो रहे कथित अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ का आरोप है कि टेंडर नवीनीकरण के नाम पर कुछ ठेकेदारों द्वारा ठेका श्रमिकों से पैसे की मांग की जा रही है। पैसे नहीं देने वाले श्रमिकों को काम से बैठाने की धमकी दी जाती है और उन पर काम नहीं करने का आरोप लगाया जाता है।
संघ ने सवाल उठाया कि जो श्रमिक पांच-दस वर्षों से लगातार काम कर रहे थे, वे टेंडर नवीनीकरण के समय अचानक काम नहीं करने वाले कैसे हो गए। संघ ने कहा कि किसी श्रमिक को काम से हटाने या बैठाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों खदानों में ठेका श्रमिकों को नियमित छुट्टी की सुविधा नहीं मिल रही है। परिवार में बीमारी, शादी या किसी सदस्य की मृत्यु होने पर अनुपस्थित रहने वाले श्रमिकों को काम से बैठाने की धमकी दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके अलावा, संघ ने दावा किया कि टेंडर में प्रावधान नहीं होने के बावजूद श्रमिकों से रात्रि पाली में काम कराया जा रहा है और उन्हें रात्रि पाली भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है।
बोनस और यूनियन में शामिल होने पर धमकी का मुद्दा: संघ ने किरीबुरू और मेघाहातुबुरू के ठेका श्रमिकों को बोनस भुगतान में कथित अनियमितता का मुद्दा भी उठाया है। संघ के अनुसार, गुवा खदान की तुलना में यहां बोनस की गणना और भुगतान की व्यवस्था अलग है। इस पर सवाल उठाते हुए संघ ने कहा कि सेल की खदानों में श्रमिकों के लिए समान नियम और पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए। संघ ने कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों पर श्रमिकों को यूनियन में शामिल नहीं होने की धमकी देने का भी आरोप लगाया। रामा पांडे ने कहा कि श्रमिकों को संगठन बनाने और उसमें शामिल होने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
यदि किसी अधिकारी या ठेकेदार द्वारा इस अधिकार में बाधा डालने या धमकी देने की शिकायत मिलती है, तो संघ इसका विरोध करेगा और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी करेगा। रामा पांडे ने बताया कि वह किरीबुरू और मेघाहातुबुरू खदानों के मुख्य महाप्रबंधकों से बात कर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को श्रम कानूनों की जानकारी देने तथा श्रमिकों को धमकाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को अपने पद का दुरुपयोग नहीं करने और श्रमिकों के अधिकारों का सम्मान करने की नसीहत दी।

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