Guwa (Sandeep Gupta) सेल प्रबंधन के चाल में फंस गए। एक दूसरे के उपर दोष लाद रहे हैं । कोई बोनस फॉर्मूला पर बात नहीं कर रहे हैं । चार सदस्यों ने हस्ताक्षर किया एक ने नहीं किया। NJCS कानून के तहत यह अवैध हो गया है। कानून कहता है सभी मुद्दे का समाधान सर्व सहमति से होना चाहिए ना कि voting से। एक ने हस्ताक्षर नहीं किया मतलब यह सर्व सहमति से नहीं हुआ है। अगर किसी की सहमति नहीं है तो उसकी बात सुननी चाहिए और सभी को एक मत होनी चाहिए थी। यह खेल हर बार होता है। नॉन NJCS के सदस्य श्रमिक संगठन झारखंड मज़दूर संघर्ष संघ झारखंड खान समूह इस बोनस बैठक पर आपत्ति दर्ज करती है। यह अवैध और on constitutional bonus agreement मानती है। हर बार की तरह इस बार भी सेल प्रबंधन और NJCS नेताओं ने कर्मचारियों को धोखा दिया है। लाभांश के आधार पर कर्मचारियों को बोनस नहीं दिया गया है।
उत्पादन और विक्रय में सामंजस्य नहीं है। तीन साल की उत्पादन और विक्रय को अवलोकन करें। कितना अंतर है और बोनस कितनी मिली है और नेताओं की माँग किया थी और प्रबंधन कितना दे रहा है । एक तरह से सीटू ने हस्ताक्षर नहीं कर कर सही किया है। कर्मचारियों की आवाज़ प्रबंधन और बाकी नेताओं ने नहीं सुनी। जो लोग हस्ताक्षर किए हैं ध्यान दें, वे लोग सेल कर्मचारी नहीं हैं और कर्मचारियों की मुद्दे को नज़र अंदाज किए हैं। अब NJCS को भंग करने की आवश्यकता है। नए श्रम कानून के तहत नई कमेटी बने और सिर्फ़ कर्मचारियों की ही कमेटी में मौजूदगी रहे।


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