डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन में नए सत्र २०२२-२०२४ के छात्र -छात्राओं का दो दिवसीय ओरिएंटेशन समारोह को संबोधित करते हुए उक्त बातें डीबीएमएस ट्रस्ट के संरक्षक श्रीमती भानुमति नीलकंठन ने कहा।
ओरिएंटेशन सत्र के उद्घाटन प्रथम दिवस २७ फरवरी को पूर्वाह्न ११ बजे डीबीएमएस ट्रस्ट की मुख्य संरक्षक श्रीमती भानुमति नीलकंठन, चेयरपर्सन फाइनेंस श्री बी.चंद्रशेखर,कौलेज की सचिव श्रीमती श्रीप्रिया धर्मराजन, संयुक्त सचिव श्रीमती उषा रामनाथन और श्रीमती तमिल सेल्वी बालाकृष्णन, प्राचार्या डॉ.जूही समर्पीता, उपप्राचार्या डॉ.मोनिका उप्पल के द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। संगीत शिक्षिका श्रीमती अमृता चौधरी ने सुमधुर स्वर में गणेश वंदना की प्रस्तुति की। सहायक प्राध्यापिका श्रीमती पामेला घोष दत्ता के सुंदर संचालन में प्रबंधन के सदस्यों तथा प्राचार्या और उप प्राचार्या का परिचय कराया।
मुख्य संरक्षक श्रीमती भानुमति नीलकंठन ने अपने संबोधन में अच्छे शिक्षक बनने के सूत्र सिखाया।श्री बी.चंद्रशेखर चेयरपर्सन ने शिक्षक के कर्तव्य और गुणों की व्याख्या करते हुए गीता की पंक्तियां उद्धृत की"ऊं पूर्णमद:पूर्णमिदं पूर्णत्पूर्ण मुदच्यते।" डॉ.जूही समर्पिता प्राचार्या ने नवांगतुक छात्र -छात्राओं का अभिनंदन किया और उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने बताया कि कौलेज के क्लास और सभी शैक्षणिक अभिक्रियाओं में शामिल होना आवश्यक है, अतः नियमित छात्राध्यापक और छात्राध्यापिकाओं के रुप में अनुशासन बद्ध होकर अपनी उपस्थिति देने के लिए प्रतिबद्ध हों।

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