कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ मनोज कुमार ने कहा कि बच्चे सेवा की भावना से कार्य कर सबों का प्रिय एवं सहयोगी बन सकते हैं। सम्मान की भावना बड़े,छोटे एवं हम उम्र के लोगों के साथ बनाकर रखनी चाहिए। इससे बच्चे सबके चहेते बन सकते हैं।
बच्चों को जीवन का मूल मंत्र बताते हुए कहा की चलने से लेकर थकान तक बच्चों को आगे चलते रहना चाहिए। शरीर से निकलने वाला पसीना किसी एंटीबायोटिक से कम नही है। प्राचार्य डॉ मनोज कुमार ने बच्चों को बताया अगर मनुष्य की सोच बड़ी हो तो उसे बड़ी सफलता मिलती है। हमेशा जीवन में आगे बढ़ने के लिए बड़ी और ऊंची सोच को रखनी चाहिए।

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