Upgrade Jharkhand News. डाइट गम्हरिया में जिले के शिक्षकों के लिए एक दिवसीय बाल अधिकार एवं संरक्षण पर कार्यशाला का उद्घाटन प्राचार्य सह जिला शिक्षा पदाधिकारी कैलाश मिश्रा एवं आगन्तुक अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्राचार्य कैलाश मिश्रा ने कुछ उदाहरण के माध्यम से बताया कि शिक्षक यदि चाहे तो शिक्षा के क्षेत्र में कायाकल्प कर सकता है। विद्यालय में बच्चों को स्वस्थ माहौल प्रदान करने में शिक्षकों की भूमिका अहम होती है। शिक्षक विद्यालय में बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में अवश्य बताएं, ताकि बच्चे भावी समस्याओं के प्रति जागरूक हो सकें। शिक्षकों को बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार रखना चाहिए कि बच्चे अपनी समस्याओं पर शिक्षक से खुलकर बातें कर सकें।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बाल संरक्षण पदाधिकारी संतोष कुमार,ने बाल अधिकार पर विस्तृत चर्चा करते हुए बाल अधिकार के विषय में बताया कि बच्चों को चार बाल अधिकार दिए गए हैं -जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सह भागिता का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार। इन अधिकारों से बच्चों को अवगत कराना शिक्षक की जिम्मेदारी होती है। साथ ही 2007 में आए किशोर न्याय अधिनियम के बारे में बताया जिसमें बालकों की देखरेख एवं संरक्षण की बात कही गयी है। इस अधिनियम में 2015 में संशोधन किया गया। बच्चों को दंडित करना अपराध की श्रेणी में आता है। पोक्सो एक्ट के तहत अधिकतम 9 वर्ष की सजा हो सकती है। 1098 नंबर पर चौबीस घंटे कॉल करके सहायता प्राप्त की जा सकती है।
गम्हरिया के थानाध्यक्ष श्री अरुण सिंह ने बताया कि किसी बच्चे के साथ अपराध होता है, उसे जानकर छुपाना भी अपराध है। 183 बी एन एस के तहत कोर्ट में बयान आने पर दोषी को सजा अवश्य होती है। किसी बच्ची के साथ यदि यौन अपराध होता है तो 24 घंटे के अंदर मेडिकल जरूरी है। अपने आसपास के लोगों द्वारा किसी बच्चे का यौन शोषण किए जाने पर सरकार की तरफ से 5 लाख तक विक्टिम कम्पोन्सशन स्कीम के तहत विक्टिम को दिए जाने का प्रावधान है।
नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर एकता प्रियदर्शी ने बताया कि पोक्सो एक्ट से बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत से नियम बताए गए हैं, पर वह तभी वास्तविक धरातल पर कारगर होंगे, जब बच्चों को अपने अधिकार की जानकारी होगी। शिक्षकों द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर स्वरूप यह बताया कि कभी - कभी इस एक्ट का दुरूपयोग भी किया गया है। इस एक्ट के विषय में इस पर भी सोचा जा रहा है कि इस एक्ट दुरूपयोग न हो और किसी निर्दोष को सजा न हो।
विद्यालय स्वस्थ एवं कल्याण कार्यक्रम के जिला कॉ ऑर्डिनेटर श्रवण कुमार ने विद्यालय स्तर पर बाल संरक्षण एवं सुरक्षा पर बताया कि शिक्षक क्या -क्या कार्य कर सकते हैं? शिक्षक प्रश्न पेटी गतिविधि को विद्यालय में प्रभावी रूप से लागू करते हुए बच्चों की समस्याओं से अवगत होकर उसके निराकरण का प्रयास कर सकते हैं। बच्चों को विद्यालय में भयमुक्त माहौल प्रदान कर सकते हैं। बच्चों को बाल अपराध के प्रति जागरूक करते हुए बाल अपराध रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इस कार्यक्रम में कुल 176 शिक्षकों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु संस्थान के संकाय सदस्य-सह -प्रभारी प्राचार्य पंकज कुमार, र लक्ष्मण राव, डॉ मनीला कुमारी,श्रीमती अनुभा सिंह, श्रीमती सीमा कुमारी, प्रधान लिपिक प्रभात कुमार मांझी, कंप्यूटर ऑपरेटर राजकिशोर कुम्भकार, राजकिशोर महतो, जवाहर राम, माइक ऑपरेटर व अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।




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