- सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ युवाओं ने भरी हुंकार
- युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन
Upgrade Jharkhand News. जमशेदपुर में बाल कल्याण संघ एवं मिरेकल फाउंडेशन इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम का आज तुलसी भवन जमशेदपुर में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को बाल श्रम, बाल विवाह एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक कर उन्हें जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार करना था। इस कार्यक्रम में पटमदा, बोड़ाम एवं घाटशिला प्रखंड के कई युवाओं ने भाग लिया।
ये सभी युवा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के विशेष अभियान का हिस्सा हैं, जिसके तहत 1000 कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे बच्चों एवं उनके परिवारों को झारखंड सरकार के सहयोग से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने एवं उन्हें आजीविका से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में इन युवाओं को इस तरह प्रशिक्षित किया जा रहा है कि वे अपने-अपने गांवों में बच्चों को स्कूल से जोड़ें, बाल श्रम एवं बाल विवाह को रोकें तथा समाज में जिम्मेदारी की भावना विकसित करें। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। पहले दिन संवाद सत्र एवं समूह चर्चा के माध्यम से युवाओं ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान की और उनके समाधान पर विचार साझा किया।
कार्यक्रम में तुलसी भवन के सचिव प्रसेनजीत तिवारी ने सामाजिक जिम्मेदारी क्या है और यह कब राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन जाती है इस पर युवाओं को कैसे ग्रहण करना चाहिए इस विषय को विस्तार से बताये।आगे उन्होंने कहा कि बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुरीतियाँ भी समाज की मानसिकता, और जागरूकता की कमी से बढ़ती हैं।उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल समस्याओं को देखने वाले नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बनें। “जरूरत है संयम, सही जानकारी और सामाजिक जिम्मेदारी की। जब युवा ठान लेते हैं, तो वे न केवल अफवाहों को रोक सकते हैं, बल्कि समाज में फैली कुरीतियों को भी खत्म कर सकते हैं, उन्होंने कहा यदि युवा संकल्प लें, तो बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को पहले परिवार, फिर समाज और अंततः राष्ट्र से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर बदलाव की मिसाल बनें।
इस अवसर पर बाल कल्याण संघ के स्टेट हेड शिवानी प्रिया ने कहा कि आज के समय में हर युवा के पास समझ, ऊर्जा और क्षमता है, लेकिन असली बदलाव तब आता है जब यह सोच जमीन पर काम में बदलती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे छोटे-छोटे प्रयासों—जैसे बच्चों को स्कूल से जोड़ना, परिवारों को योजनाओं की जानकारी देना और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाना—को अपनी दैनिक जिम्मेदारी बनाएं।
इस दौरान मिरेकल फाउंडेशन इंडिया के स्टेट हेड नीपा दास ने बाल श्रम एवं बाल विवाह की पहचान के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा स्कूल छोड़कर काम करता दिखे, या कम उम्र में विवाह की तैयारी हो रही हो, तो ऐसे मामलों में तुरंत सतर्क होकर उचित कदम उठाना जरूरी है।




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