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Bhopal दृष्टिकोण : फर्जी बाबाओं के व्यभिचारी मकड़जाल Viewpoint: The adulterous web of fake babas

 


Upgrade Jharkhand News. धर्म एक अनुशासनात्मक जीवन शैली का परिचायक है, किन्तु धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर तथाकथित धर्मगुरुओं और ज्योतिषियों द्वारा मर्यादा के विपरीत आचरण समाज में किस प्रकार पतन का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। कहना गलत न होगा कि आधुनिक युग में टोने टोटके, ज्योतिष के नाम पर पाखंडियों का व्यभिचारी आचरण जहाँ ज्योतिष विद्या को बदनाम कर रहा है, वहीं उनकी कुत्सित मनोवृत्ति के चलते समाज में वासना का गन्दा खेल खेला जा रहा है। यदि ऐसा न होता, तो महाराष्ट्र के एक फर्जी ज्योतिषी अशोक कुमार खरात उर्फ़ केप्टन बाबा के 150 से अधिक महिलाओं के साथ देह संबंधो का खुलासा न होता।  अशोक खरात तो एक उदाहरण भर है, यदि फर्जी ज्योतिषियों की जांच की जाए, तो ऐसे ज्योतिषियों की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है, जो नारी दुर्बलता का लाभ उठाकर उन्हें अपने चंगुल में फंसा कर व्यभिचार करने से नहीं चूकते तथा तंत्र, मंत्र विद्या, सम्मोहन तथा अनेक प्रकार के प्रपंच रचकर नारियों का आर्थिक व दैहिक शोषण करते हैं।


यदा कदा ऐसे प्रसंग सामने आते ही रहते हैं, कि सुनियोजित तरीक़े से ऐसे तत्वों का एक बड़ा साम्राज्य खड़ा होता है, जिनके प्रभाव में आकर सियासत से जुड़े प्रतिष्ठित लोग भी ऐसे तत्वों को बढ़ावा देते हैं। ताज्जुब तब होता है, कि जब ऐसे ढोंगियों की शिकार समाज की संभ्रांत और प्रतिष्ठित समझी जाने वाली महिलाएँ भी हो जाती हैं। फर्जी ज्योतिषी बाबा अपनी कामेच्छा पूरी करने के लिए अंधविश्वास से ग्रस्त महिलाओं को भय दिखाकर अपनी मनमानी करने में पीछे नहीं रहते तथा जिस समय यौन शोषण के पीछे ज्योतिषी के मंसूबों की कलई खुलती है, उस समय बहुत देर हो चुकी होती है। बहरहाल एक ओर जहाँ देश आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है तथा नारी सशक्तिकरण की बातें की जा रही हैं, वहाँ प्रभावशाली महिलाओं का ऐसे ज्योतिषियों को अपना धर्मगुरु मानकर अनुसरण करना यह सिद्ध करता है, कि व्यभिचारी आचरण किसी की भी बुद्धि हर सकता है तथा किसी भी प्रभावशाली समझे जाने वाले व्यक्ति का काला सच उजागर करने में समर्थ हो सकता है। इस श्रेणी में फर्जी ज्योतिषियों की तरह अनेक ऐसे व्यभिचारी आते हैं, जो धर्म की आड़ में तंत्र विद्या का प्रचार करके अपने व्यभिचारी मंसूबों को पूरा करते हैं। इस प्रकार के प्रकरणों में किसी धर्म विशेष के धर्मगुरुओं को सीमित रखना उचित नहीं है, अधिकांश धर्मों में इस प्रकार के व्याभिचारी किस्से प्रकाश में आते रहे हैं। सवाल यह है कि धर्म और ज्योतिष की आड़ में इस प्रकार के गोरख धंधे को आखिर कब तक खुली छूट मिली रहेगी ? डॉ.सुधाकर आशावादी



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