- अपराधियों के बढ़ते हौसलों के खिलाफ जनता एकजुट : रघुवर दास पूर्व सीएम।
Jamshedpur (Nagendra) झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुवर दास ने जमशेदपुर में लगातार बढ़ते जघन्य अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के विरोध में भाजपा जमशेदपुर महानगर द्वारा आहूत बंद को ऐतिहासिक, स्वतःस्फूर्त एवं जनभावनाओं का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि इस बंद की अभूतपूर्व सफलता ने स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड की जनता राज्य सरकार की नीतियों और विधि-व्यवस्था की स्थिति से बेहद आक्रोशित एवं त्रस्त है। जनता अब मूकदर्शक बनकर रहने वाली नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए आवाज बुलंद कर रही है। कहा कि जमशेदपुर की जनता ने इस बंद को सफल बनाकर सीधा संदेश दिया है कि शहर में बढ़ते अपराध, हत्याएं, चापड़बाजी, लूट, छिनतई और असुरक्षा के माहौल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जनता जवाबदेह और संवेदनशील शासन चाहती है और कानून का राज स्थापित देखना चाहती है। वहीं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी ने कहा कि जमशेदपुर की जनता ने बंद को समर्थन देकर हेमंत सरकार के कार्यकाल में प्रतिदिन हो रहे चोरी, लूट एवं विभिन्न अपराधिक घटनाओं के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है । डॉ गोस्वामी ने कहा कि पुलिस के सामने अपराधियों के द्वारा हिमांशु पर किए गए कातिलाने हमले से सम्पूर्ण जमशेदपुर सहम गया है तथा लोग आक्रोशित हैं। उन्होंने सरकार से अपराध के मामलों में जिरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की माँग की।
जिलाध्यक्ष संजीव सिन्हा ने कहा कि बिष्टुपुर में पुलिस की मौजूदगी में हुए हिमांशु सिंह हत्याकांड, शहर में लगातार बढ़ रही चापड़बाजी, चाकूबाजी, लूट, चोरी, नशे के बढ़ते कारोबार, छिनतई, प्रशासनिक विफलता और ध्वस्त कानून-व्यवस्था के विरोध में आहूत जमशेदपुर बंद को शहरवासियों का व्यापक और अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ। जमशेदपुर बंद के दौरान शहर के व्यापारिक प्रतिष्ठानों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, परिवहन संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों ने बंद का समर्थन कर अपराध और अराजकता के विरुद्ध एकजुटता दिखाई। उन्होंने बंद को अभूतपूर्व सफल बताते हुए शहरवासियों के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि बंद के दौरान लोगों ने स्वतः स्फूर्त अपने दुकान, प्रतिष्ठान को बंद रखा। जो शहर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निष्क्रियता और सरकार की विफल नीतियों के खिलाफ जनता के आक्रोश की अभिव्यक्ति थी।


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