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Bhopal खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर उठते सवाल Questions raised about the quality of food

 


Upgrade Jharkhand News.  खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के मामले में भारत को बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है। कहीं भयानक कीटनाशकों से खेती पर प्रभाव, तो कहीं खाद्य पदार्थों में मिलावट। कुल मिलाकर आम व्यक्ति का स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है। आज हम चर्चा करेंगे बाजार में मिलने वाले तले हुए व्यंजनों के बारे में। तली हुई खाद्य सामग्रियों में सबसे ज्यादा खाए जाते हैं-समोसे, आलू बंडे, मुंगोड़े, पकौड़े, सैंडविच, मंचूरियन, बिरयानी, चिकन बिरयानी, मटन बिरयानी, चिकन मोमोज, मटन मोमोज, तरह-तरह के पिज्जा, हॉटडॉग, मटन, चिकन, अंडा जैसे न जाने कितने किस्म के खाद्य पदार्थ। अगर तमाम खाद्य पदार्थों की मध्यम व ऊँचे स्तर की दुकानों को थोड़ी या ज्यादा देर के लिए हाशिए पर कर दें, तो स्थिति अत्यंत गंभीर हो जाती है। आपत्तिजनक पदार्थों में ज्यादा देर तक खाद्य पदार्थों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रिजरवेटिव्स मिलाए जाते हैं। तरह-तरह के केमिकल्स मिलाए जाते हैं। खाद्य पदार्थों को आकर्षक बनाए रखने के लिए उसमें लाल, पीला, गुलाबी रंग मिलाए जाते हैं, जो अपने आप में शुद्ध नहीं होते।


इन खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त होने वाला तेल भी सुरक्षित नहीं होता। एक तो बाहर का प्रदूषण उड़कर आता है, दूसरे एक ही तेल का इस्तेमाल न जाने कितने दिनों तक किया जाता है। और ऐसे पदार्थों के सेवन से बहुत ही भयंकर जानलेवा बीमारियाँ हो जाती हैं। ट्यूमर-कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बहुत बड़ी तादाद में बढ़ जाता है। अपच, पेट दर्द, सिर में चक्कर, शरीर में कमजोरी, रोग-प्रतिरोधक क्षमता में कमी,यह सब पौष्टिकताहीन पदार्थों की वजह से होने वाली आम समस्याएँ हैं। माना कि जनसंख्या बढ़ रही है, रोजगार की कमी है,रोजगार के लिए भटक रहे युवाओं को सहारे की जरूरत है। मगर इसका मतलब यह नहीं कि हर नुक्कड़-चौराहे पर पौष्टिकताहीन पदार्थों को लेकर बैठ जाएँ। पैसा कमाना है, खाद्य पदार्थों की दुकान खोलनी है तो सुरक्षित स्थान पर, सुरक्षित तरीके से खोली जाए, सुरक्षित सामग्रियों से भोजन व व्यंजन बनाए जाएँ। किस पदार्थ में कौन से रोगाणु व कीटाणु हैं, क्या मटन-चिकन में कोई अशुद्धि है, इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए। बहुत अच्छा होगा अगर भोजन सात्विक हो।


हमारे खाद्य विभागों को इस बारे में चौकन्ना रहना चाहिए। समय-समय पर औचक जाँच व सैंपलिंग होती रहनी चाहिए। लालच में नहीं पड़ना चाहिए। अगर अमला लालच में पड़ेगा तो बहुत सारे लोगों की जानें जा सकती हैं। स्वस्थ खाकर ही आदमी स्वस्थ रह सकता है। सरकार बेरोजगारों की मदद करे और लोगों की जानों की रक्षा भी करे। बेचने वाला भी खुश और खाने वाला भी खुश,एक ऐसा माहौल निर्मित होना चाहिए। आर. सूर्य कुमारी



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