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Bhopal दृष्टिकोण : सार्वजनिक अभद्रता पर अंकुश आवश्यक Viewpoint: Public indecency must be curbed

 


Upgrade Jharkhand News.  यदि सोशल मीडिया प्रभावी न होता, तो देश भर में अभिव्यक्ति और आजादी के नाम पर की जाने वाली बेहूदा हरकतों की जानकारी जनमानस को नहीं हो पाती। सड़कों पर अभद्रता के किस्से प्रकाश में न आते और न ही सार्वजानिक स्थलों पर मानवता के विरुद्ध किये जाने वाले आचरण का खुलासा होता।  चलती ट्रेन में यात्रियों से भरी बोगी में किसी व्यक्ति का खुलेआम मूत्र विसर्जित करने का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह व्यक्ति बिना किसी भय के बोगी की गैलरी में मूत्र विसर्जित कर रहा है। इसी प्रकार किसी युवती का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह बिना टिकट यात्रा कर रही है और टिकट मांगे जाने पर टिकट चैकर से अभद्रता कर रही है तथा उसी पर अभद्रता करने का आरोप लगाने के लिए अपने कपड़े फाड़ रही है। किसी अध्यापिका का भी एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह बेख़ौफ़ बेटिकट यात्रा करती है तथा टिकट मांगने पर अभद्रता करती है। विभिन्न आंदोलनों में कुछ युवतियों द्वारा भी बेहूदा हरकतें करने किसी को भी अश्लील भद्दी भद्दी गालियाँ देने तथा अश्लील हरकतें करने के वीडियो वायरल हुए हैं। 


ऐसा लगता है, कि जैसे सामाजिक मर्यादा और अनुशासन जैसे शब्द लोगों की जीवनचर्या से लुप्त हो चुके हैं। मध्यप्रदेश के एक विद्यालय में किसी शिक्षिका से छेड़छाड़ का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कोई अतिथि शिक्षक अभद्रता की सीमायें लांघता हुए दिखाई दे रहा है तथा पुलिसकर्मियों से अभद्रता करता हुआ दिखाई दे रहा है। यदि सोशल मीडिया पर इस प्रकार की रील्स का संकलन किया जाए, तो कोई ऐसा दिन नहीं होगा, जिस दिन बेहूदगी भरी रील प्रकाश में न आती हों। इस प्रकार की बेहूदा रील्स समाज पर कैसा प्रभाव डालती है, समझा जा सकता है, क्योंकि अपनी अपनी वृत्ति के अनुसार व्यक्ति इन रील्स के माध्यम से आचरण करता है। बेहूदगी को पसंद करने वाले लोग ऐसी रील्स का अनुसरण करते हुए बेहूदगी को बढ़ावा देते हैं। तस्वीर के नकारात्मक पक्ष को हर कोई नहीं समझता। 


सच तो यह भी है कि ऐसे तत्वों को न कानून की परवाह रहती है और न ही पुलिस प्रशासन का भय। इन रील्स में कितनी सच्चाई है, कितनी नहीं, यह तो पर्याप्त परीक्षण के उपरांत ही स्पष्ट हो सकता है, किन्तु सार्वजनिक स्थलों ट्रेन, बस या विभिन्न आंदोलनों में की जाने वाली बेहूदगी झूठ नहीं हो सकती। ऐसे में समाज में विकृति परोसने वालों की बेहूदा हरकतों पर अंकुश लगाने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने अपेक्षित हैं। डॉ. सुधाकर आशावादी



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