Guwa (Sandeep Gupta) सेल की बोलानी लौह अयस्क खदान में श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं, कथित शोषण और सुविधाओं में कटौती को लेकर लंबे समय से असंतोष की स्थिति बनी हुई थी। स्थानीय श्रमिकों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को लेकर स्थानीय एवं केंद्रीय श्रमिक संगठन अपेक्षित रूप से आवाज नहीं उठा रहे थे। इसी बीच कुछ श्रमिकों ने झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे को बोलानी खदान में श्रमिकों के साथ कथित शोषण और दुर्व्यवहार की जानकारी दी।
श्रमिकों की समस्याएं सुनने के बाद रामा पांडे ने मामले पर चिंता जताते हुए किरीबुरू के महामंत्री राजेंद्र सिंधिया को इसकी जानकारी लेने की जिम्मेदारी सौंपी। श्रमिकों के अनुसार, ठेका श्रमिकों के साथ बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार किए जाने, कुछ अधिकारियों पर श्रमिकों के साथ हाथापाई के आरोप तथा प्रशिक्षण में कार्यरत मजदूरों को मिलने वाली सुविधाएं बंद किए जाने जैसी समस्याएं सामने आईं। मामले को देखते हुए रामा पांडे ने बोलानी में ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ का संगठनात्मक विस्तार करने का निर्णय लिया। इसके तहत 26 सितंबर 2026 को बोलानी में आमसभा आयोजित की गई, जिसमें ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ, बोलानी इकाई के गठन की घोषणा की गई। संगठन के गठन के शुरुआती चरण में ही 236 ठेका श्रमिकों और 45 नियमित कर्मचारियों ने सदस्यता ग्रहण की।
आमसभा में श्रमिकों को संगठन की आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी गई। संगठन के संचालन के लिए जल्द समिति का गठन कर इसकी सूचना खदान प्रबंधन को देने की बात कही गई। संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी किरीबुरू के महामंत्री राजेंद्र सिंधिया, संयुक्त महामंत्री सुनील कुमार पासवान और मेघाहातुबुरु के उपमहामंत्री इंतखाब आलम को दी गई। आमसभा में रामा पांडे के अलावा गुवा के महामंत्री अंतर्यामी महाकुड, युवा नेता रोहित पांडे, चिड़िया के महामंत्री गंगा ठाकुर, उपाध्यक्ष राजीव सांडिल, राजीव कच्छप, मेघाहातुबुरु से इंतखाब आलम, जेएस गिल, दयानंद कुमार, आनंद हेसा पूर्ति, रोहित लोहार, एमडी जावेद, आफताब लाली, बासुदेव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
किरीबुरू से राजेंद्र सिंधिया, सुनील कुमार पासवान, एलएन राउत, प्रभा सिद्धू, लखन चाम्पिया, संजय तिग्गा, भीमसेन महानता, रंजीत मिस्टिकर, सुभाष दास और मधुसूदन नायक सहित अन्य सदस्य मौजूद थे। नए संगठन के गठन के बाद बोलानी के श्रमिकों में उत्साह देखा गया। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं को संगठित तरीके से प्रबंधन के समक्ष रखा जाएगा और उनके अधिकारों के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी।



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