- जीवित पुत्र को दरकिनार कर पिता को बताया निःसंतान, पीड़ित ने उठाए दस्तावेजों की वैधता पर सवाल
Upgrade Jharkhand News. जल-जंगल-जमीन की रक्षा और आदिवासी अधिकारों के बीच नीमडीह में प्रस्तावित एसएम स्टील्स एंड पावर लिमिटेड के लिए जमीन हस्तांतरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आदरडीह गांव में एक आदिवासी रैयत की 3 एकड़ 41 डिसमिल पैतृक जमीन को कथित जाली वंशावली के आधार पर कंपनी के नाम हस्तांतरित किए जाने का आरोप लगा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जमीन के मालिक स्वर्गीय यादव सिंह उर्फ यदु भूमिज के पुत्र जगबंधु सिंह स्वयं को उनका कानूनी वारिस बता रहे हैं, उसी वंशावली में यादव सिंह को कथित रूप से निःसंतान कैसे दर्शाया गया?
आदरडीह निवासी जगबंधु सिंह ने इस मामले में नीमडीह के अंचल अधिकारी (सीओ) और थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने, एफआइआर दर्ज करने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में उन्होंने जमीन के हस्तांतरण की वैधता की भी जांच कराने का आग्रह किया है।
खाते-प्लॉट से लेकर जमीन के रकबे तक दर्ज हैं विवरण -आवेदन के अनुसार मौजा आदरडीह, थाना नंबर 292, खाता संख्या 378 और प्लॉट संख्या 2190 में 3 एकड़ 41 डिसमिल जमीन स्वर्गीय यादव सिंह उर्फ यदु भूमिज के नाम दर्ज है। जगबंधु सिंह का दावा है कि वे यादव सिंह के पुत्र हैं और जमीन में उनका पैतृक एवं कानूनी अधिकार है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद कथित रूप से ऐसी वंशावली तैयार की गई, जिसमें उनके पिता को निःसंतान दर्शाया गया।
गवाहों के हस्ताक्षर से तैयार हुई कथित वंशावली -जगबंधु सिंह ने ग्राम प्रधान श्यामपद कुमार, संजय सिंह, लालू सिंह (पुत्र स्वर्गीय भंदु सिंह), एसएम स्टील्स एंड पावर लिमिटेड के प्रतिनिधि राजीव मुखर्जी समेत अन्य लोगों पर कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। वंशावली में सुभाष सिंह, सनत कुमार, मधुसूदन कुमार, हितेश कुमार और नगेन कुमार के नाम गवाह के रूप में दर्ज हैं। आरोप है कि इसी कथित वंशावली के आधार पर जमीन का हस्तांतरण एसएम स्टील्स एंड पावर लिमिटेड के नाम कर दिया गया।
जांच में खुल सकता है जमीन हस्तांतरण का पूरा सच -पीड़ित का आरोप है कि उन्हें और उनके पैतृक अधिकार को छिपाकर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति हुई है। अब उनकी मांग है कि प्रशासन कथित वंशावली के आधार, तैयार करने की प्रक्रिया, गवाहों के हस्ताक्षर और जमीन हस्तांतरण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जमीन के वास्तविक उत्तराधिकारियों की जानकारी के बावजूद हस्तांतरण कैसे हुआ। मामले में प्रशासनिक और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वंशावली और भूमि हस्तांतरण में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। हालांकि, जीवित पुत्र द्वारा स्वयं को कानूनी वारिस बताए जाने के बाद पिता को निःसंतान दर्शाने संबंधी आरोप ने पूरे भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सवालों के घेरे में ला दिया है।


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