Jamshedpur (Nagendra) बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन, पुलिस, न्यायिक संस्थाओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों, मीडिया, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों को सामूहिक रूप से काम करना होगा। बाल श्रम, बाल विवाह, हिंसा, तस्करी और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिम बच्चों के संरक्षण के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। ये बातें मंगलवार को होटल कैनेलाइट, साकची में आदर्श सेवा संस्थान एवं रूरल डेवलपमेंट एसोसिएशन (RDA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय ‘संवाद’ में सामने आईं।
कार्यक्रम का उद्देश्य बाल संरक्षण के लिए काम कर रहे विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर मौजूदा चुनौतियों, प्रयासों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करना था। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर की। अतिथियों का पौधा और मोमेंटो देकर स्वागत किया गया। अध्यक्षता आदर्श सेवा संस्थान की अध्यक्ष डॉ. निर्मला शुक्ला ने की, जबकि संचालन एम. अरविन्दा ने किया। झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य विकास दोदराजका ने कहा कि बच्चों के अधिकारों को लेकर आज भी बड़ा अंतर मौजूद है। सरकार ने देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए हैं, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे शोषण का शिकार हो रहे हैं। बाल मजदूरी, बाल विवाह और नशा बच्चों के सामने गंभीर चुनौतियां हैं।
विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) के मनोज कुमार ने कहा कि बच्चों के साथ कठोरता के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना जरूरी है। बच्चों से बेहतर तरीके से संवाद किया जाए तो सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। TdH Suisse के क्षेत्रीय समन्वयक-एशिया एवं राष्ट्रीय समन्वयक-इंडिया आशीष घोष ने कहा कि ‘संवाद’ का उद्देश्य बच्चों के साथ मिलकर काम करने की दिशा तैयार करना है। बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उनके दृष्टिकोण को समझना जरूरी है। साइबर थाना प्रभारी श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक और साइबर दुनिया का प्रभाव और बढ़ेगा। बच्चों के लिए साइबर बुलिंग, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, ब्लैकमेल और ऑनलाइन गेमिंग गंभीर जोखिम हैं। उन्होंने कहा कि कई बच्चे ऑनलाइन गेमिंग के दौरान अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं और समस्या बढ़ने के बाद परिवार को इसकी जानकारी होती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ दोस्ताना संबंध रखने, संदिग्ध लोगों को ब्लॉक करने और साइबर अपराध की स्थिति में 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की।
RDA के कार्यक्रम प्रबंधक सुजॉय भट्टाचार्य ने संस्था के कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण जीवन और चाइल्ड फ्रेंडली वातावरण के निर्माण पर काम किया जा रहा है। इंडियन यूथ काउंसिल (IYC) के सदस्यों ने पंचायत एवं गांव स्तर पर मिशन वात्सल्य के तहत बाल संरक्षण समितियों के गठन, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता, जिला बाल संरक्षण इकाई के माध्यम से छात्रवृत्ति, प्रत्येक पंचायत में आवासीय विद्यालय, 16 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग और बाल सुधार गृह से बाहर आने वाले बच्चों के पुनर्वास की मांग उठाई। इस संबंध में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को मांग पत्र भी सौंपा गया। कार्यक्रम के पैनल डिस्कशन में बाल कल्याण समिति के सदस्य पवन कुमार, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी प्रेम प्रकाश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की वरिष्ठ अधिवक्ता प्रीती मुर्मू, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य सुधीर कुमार प्रसाद, प्रेस क्लब ऑफ़ जमशेदपुर महासचिव सचिव एवं पत्रकार विकास श्रीवास्तव, शिक्षक अरविन्द तिवारी और जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू शामिल हुए। संचालन आदर्श सेवा संस्थान की लक्खी दास ने किया।
जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी प्रेम प्रकाश ने कहा कि जिले को चाइल्ड फ्रेंडली बनाना सभी विभागों की जिम्मेदारी है। बाल हिंसा, बाल विवाह, बाल श्रम और डिजिटल प्लेटफॉर्म को उन्होंने प्रमुख चुनौतियां बताया। बाल कल्याण समिति की ओर से कहा गया कि देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के सर्वोत्तम हित में निर्णय लेना समिति की प्राथमिकता है। बाल श्रम, बाल विवाह और मानव तस्करी की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य सुधीर कुमार प्रसाद ने कहा कि बोर्ड में बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाता है और उनकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। बच्चों को कौशल विकास से भी जोड़ा जाता है। शिक्षक अरविन्द तिवारी ने कहा कि शिक्षकों को चाइल्ड फ्रेंडली होना चाहिए, क्योंकि कई बार बच्चे वे बातें शिक्षक से साझा करते हैं जो वे अपने माता-पिता से नहीं कह पाते। DLSA की अधिवक्ता प्रीती मुर्मू ने कहा कि कानून ने बच्चों को कई अधिकार दिए हैं और गरीब एवं ग्रामीण बच्चों तक निःशुल्क कानूनी सहायता पहुंचाना जरूरी है। जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू ने पंचायत एवं जिला परिषद की योजनाओं में बाल संरक्षण को प्राथमिकता देने की मांग की।
मीडिया की भूमिका पर बोलते हुए पत्रकार विकास श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों से जुड़ी खबरों में मीडिया को संवेदनशीलता और सम्मान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है। POCSO मामलों में बच्चों को बार-बार बयान देने की स्थिति से बचाने के लिए चाइल्ड फ्रेंडली वातावरण और बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। ‘युवाओं की नजर में बाल संरक्षण’ विषय पर आयोजित पैनल में IYC के सोनू गिरी, बंदना दास, डोली पातर, सोम कंसारी, नंदिनी कुमारी और रिंकी पाल ने विचार रखे। युवाओं ने साइबर बुलिंग, फर्जी अकाउंट, ब्लैकमेल, बाल विवाह, बाल मजदूरी, स्कूल ड्रॉपआउट और लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दे उठाए। युवाओं ने पंचायत एवं गांव स्तर पर लाइब्रेरी, प्रतियोगिता कक्षाएं, खेल गतिविधियां, बाल अधिकार जागरूकता कार्यक्रम और बाल संगठनों को मजबूत करने की जरूरत बताई।
नुक्कड़ नाटक, रैली और वॉल पेंटिंग के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने का भी सुझाव दिया गया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को बाल संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा मानने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के समापन पर आदर्श सेवा संस्थान की परियोजना समन्वयक उषा महतो ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों, सामाजिक संस्थाओं, युवाओं और बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।


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