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आत्म कथा : आज जब पीछे मोड़कर देखता हूं तो आश्चर्य चकित हो जाता हूँ : सुनील कुमार दे, Autobiography: Today, when I look back, I am amazed: Sunil Kumar De


हाता। मैं  बचपन से ही भगवान रामकृष्ण परमहंस देव, माँ सारदा देवी व स्वामी विवेकानंद का भक्त हूँ। जब मैं 1971 साल में गिरिभारती हाई स्कूल हल्दीपोखर में पढ़ता था उसी समय से यह तीनों बिभूति मेरे जीवन में प्रवेश किया और समाज तथा मानव सेवा करने के लिए अंदर से प्रेरणा दिया। आज मेरी उम्र सर्टिफिकेट के अनुसार 65 और सही उम्र 67 साल चल रहा है। 1971 से साहित्य सेवा और 1978 से समाज सेवा में हूं।1981 में मेरा कर्म जीवन शुरू हुआ। तब से मेरा साहित्य और समाज सेवा करने की रप्तार बढ़ गई। मैं निम्नलिखित कुछ संस्थाओं का नाम उल्लेख करना चाहूंगा, जिसके बैनर तले मैं साहित्य और समाज सेवा कर पाया।

1.नवजागरण क्लब नुआग्राम : इसकी स्थापना सन 1968 में हुई थी जब मैं छोटा था। छात्र जीवन से इस क्लब से जुड़ गया। गांव के इस क्लब के माध्यम से सरस्वती पूजा, लक्ष्मी पूजा, यात्रा, नाटक, हरिनाम संकीर्तन और सामाजिक काम किया।

2.विवेकानंद युवा समिति,नुआग्राम : विवेकानंद युवा समिति की स्थापना 30/6/1991 को हुई। नव जागरण क्लब का यह नया रूप था। समिति में मैं अहम भूमिका निभाई। इस समिति के माध्यम से 2000 साल तक तड़ित कप क्रिकेट प्रतियोगिता, नेताजी कप, हराधन कप क्रिकेट प्रतियोगिता, नेताजी जयंती, विवेकानंद जयंती, रक्तदान शिविर, सांस्कृतिक प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन के अलावे अनेक सामाजिक और सेवा मूलक काम किया।

3.झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद,नुआग्राम : इस परिषद की स्थापना साहित्य और संस्कृति के प्रचार और प्रसार के लिये 24/9/2004 को नुआग्राम में किया गया था। इस परिषद के माध्यम से साहित्य संस्कृति सम्मेलन, साहित्य प्रतियोगिता, साहित्य चर्चा,कवि सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्ज्यक्रम, मैट्रिक टॉपरों का सम्मान, कवि,लेखक, समाजसेवक, शिक्षक का सम्मान, बहुभाषी साहित्य पत्रिका झारखंड प्रभा का प्रकाशन आदि कार्यक्रम किया गया।मैं झारखंड प्रभा का संपादक भी रहे और आज भी है। यह सिलसिला 2018 तक चली। 2017 में मेरा हार्ट ब्लॉक हो गया और परिषद के सचिव शंकर चंद्र गोप भी बीमार पड़ गए इसलिए 2019 से 2022 तक पत्रिका प्रकाशन और कार्यक्रम बंद हो गया। फिर 2022 में परिषद का पुनर्गठन किया गया और पत्रिका प्रकाशन फिर से शुरू हो गया।

4.माताजी आश्रम हाता : माताजी आश्रम हाता मेरा तीर्थ भूमि और कर्मभूमि दोनों है। मेरा आध्यात्मिक जीवन इस आश्रम से शुरू हुआ है। मैं इस आश्रम से विगत 50 सालों से जुड़ा हुआ हूं। 1971 साल से लेख प्रतियोगिता के माध्यम से माताजी आश्रम का परिचय हुआ। उस समय आश्रम के द्वितीय माताजी रानुमा थी। धीरे-धीरे डॉ भवानी प्रसाद सेन के साथ परिचय हुआ और 1978 में दिच्छा लेकर आश्रम के साथ पूर्ण रुप से जुड़ गया। आना जाना और आश्रम सेवा भी शुरु हो गया। विगत 35 साल से आश्रम का संचालन कर रहा हूँ कभी सदस्य के रूप में, कभी कोषाध्यक्ष के रूप में तो कभी सचिव के रुप में। आज आश्रम में ट्रस्टी के रूप में सेवा दे रहा हूं। इस आश्रम के माध्यम से गुरुपूर्णिमा, कथामृत उत्सव, जन्मास्टमी,  विजया सम्मेलन, योगेश्वरी माँ की जयंती, कालीपूजा, सारदा जयंती, विवेकानंद जयंती, युवा दिवस, सांस्कृतिक प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन, रामकृष्ण जयंती, धर्म सभा, भक्ति संगीत, रामायण गान, पदावली कीर्तन, बाउल संगीत, हरिनाम संकीर्तन के अलावे रक्तदान शिविर, नेत्र चिकित्सा शिविर, अन्नबस्त्र दान, चिकित्सा शिविर, योग शिविर, सिलाई कड़ाई प्रशिक्षण, गांव-गांव में सत्संग और धर्म प्रचार आदि अनेक लोक कल्याण और समाज निर्माण का काम किया गया। काम अभी भी जारी है। मेरे समय में आश्रम का अनेक विकास का काम  भी हुआ। 14 मार्च 2022 को भगवान रामकृष्ण देव का भब्य मंदिर की प्रतिष्ठा भी हुई। आश्रम अभी सुचारू रूप से चल रहा है। आश्रम का बहुत काम अभी बाकी है। प्रभु अगर साथ देंगे तो धीरे-धीरे वह भी काम पूरा हो जायेगा। अभी माताजी आश्रम में विगत 23/4/2023 से नि:शुल्क रूप से बंगला भाषा की शिक्षा दी जा रही है।

5.भारत संचार निगम लिमिटेड जमशेदपुर : मैं बीएसएनएल जमशेदपुर में उस समय दूर संचार विभाग था विगत 4/11/1981से 31/1/2019 तक सेवा प्रदान किया। 37 सालों की सेवा में मुझे विभाग से काफी प्यार और सन्मान मिला। मुझे विभाग ने जो काम का दायित्व सोपा मैं ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक काम किया। विभाग में हिंदी का प्रचार प्रसार और गृह पत्रिका जमशेदपुर संचार दर्पण प्रकाशन  में काफी सहयोग किया। पत्रिका का संपादक भी रहे। विभाग में उत्कृष्ट सेवा और योगदान के लिये मुझे विभाग का सर्बच्च सम्मान विशिष्ट संचार सेवा पदक 2016 देकर और हिंदी सेवा के लिए राजभाषा सम्मान देकर  सम्मानित भी किया है यह मेरे लिए गौरव की बात है।

इसके अलावे विद्या भारती इंग्लिश स्कूल, गिरिभारती हाई स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर हेंसल के स्कूल कमेटी में सदस्य भी रह चुका हूँ और शिक्षा का विकास में योगदान दे चुका हूं। अभी विद्या भारती स्कूल के समाधान समिति के अंकेच्छक भी हूँ। इसके अलावे रामकृष्ण मिशन जमशेदपुर, झारखंड बंगाली समिति जमशेदपुर, वीबीडीए जमशेदपुर, रामगढ़ आश्रम हाता, बजरंग बली पूजा समिति हेंसल, विवेकानंद जन्मोत्सव समिति कोलकाता, पोटका डिग्री कॉलेज ,सुभाष संस्कृति परिषद जमशेदपुर, समाज कल्याण युवा समिति खैरपालआदि संस्थाओ के साथ जुड़ा हुआ हूँ और समाजसेवा में योगदान दे रहा हूँ।

इसके अलावे व्यक्तिगत रूप में गांव गांव में जाकर रक्तदान शिविर का प्रचार प्रसार करना और रक्तदान शिविर का आयोजन करना ,लोगों के अंदर भक्ति भाव और धर्म भाव जगाना भी मेरा जीवन का एक अहम हिस्सा रही।करीब 500 लोगों को मैं ने भक्त बनाया और रामकृष्ण नाम की दिच्छा दिलाया। यह मेरे जीवन के लिए एक पुण्य का काम है।

इसके अलावे विगत 45 सालों से साहित्य साधना करते हुए बंगला में 26 और हिंदी में 8 अर्थात कुल 34 पुस्तकें प्रकाशित करना भी मेरी जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि रही। 2022 में इतिहासिक और धार्मिक पुस्तक,, कापड़ गादी घाटेर रुंकिनी माँ और 2023 में युगपुरुष बिनय दास बाबाजी और महातीर्थ मुक्तेश्वर धाम पुस्तकें प्रकाशित की है । यह सारे तीन पुस्तकें लोगों को काफी पसंद आया है। साहित्य और समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए समय-समय पर अनेक संस्थाओं ने मुझे  सम्मानित भी किया है तथा अभी भी कर रहा है। मैं इसके लिए आभारी हूं।कुछ दिन शारीरिक अश्वस्थ के कारण ठीक से सेवा नहीं दे पा रहा था लेकिन प्रभु की कृपा से मैं अभी ठीक हूँ और साहित्य और समाज सेवा फिर से कर रहा हूँ साथ साथ माताजी आश्रम और ठाकुर जी की सेवा भी कर रहा हूँ।इसके अलावे बंगला भाषा की प्रचार प्रसार में भी लगे हुए हूँ और जितने दिन रहूंगा सेवा कार्य करता रहूंगा। कभी कभी पीछे मुड़कर जब क्रिया कलापों को याद करता हूं तो आश्चर्य चकित हो जाता हूँ और सोचता हूँ इस छुद्र जीवन में कैसे इतने सारे काम कर लिया।यह सब ऊपर वाला की कृपा है। इसलिए मैं मेरे प्रियजनों के बीच मेरे 67 बर्ष का सफर को मैं ने शेयर किया।यह जानकारी के लिए प्रचार के लिए नहीं।

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