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Chaibasa सेल का बुलडोजर चला, विरोध के बाद प्रशासन झुका; विस्थापितों को मिला दो दिन का समय SAIL's bulldozers were used, and the administration relented after protests; displaced people were given two days' time.

 


Guwa (Sandeep Gupta) गुवा बाजार स्थित डिपासाई और जाटा हाटिंग क्षेत्र में शनिवार को सेल प्रबंधन द्वारा अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान विस्थापितों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। अचानक शुरू हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुटने लगे। इस अभियान को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। 


मौके पर मजिस्ट्रेट के रूप में अंचलाधिकारी मनोज कुमार तैनात थे, जबकि प्रखंड विकास पदाधिकारी पप्पू रजक, इंस्पेक्टर वासुदेव मुंडा सहित गुवा, बड़ाजामदा, नोवामुंड़ी और किरीबुरू थाना प्रभारी मौजूद रहे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए लगभग 500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। प्रशासन की इस भारी मौजूदगी के बावजूद विस्थापितों का आक्रोश खुलकर सामने आया। जैसे ही बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई, विस्थापितों ने इसका जोरदार विरोध किया। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। 


इस दौरान नोवामुंड़ी भाग-एक की जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी, पूर्वी पंचायत की मुखिया चांदमनी लागुरी और झामुमो नेता मोहम्मद तबारक भी मौके पर पहुंचे और विस्थापितों का समर्थन किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक हर विस्थापित को पुनर्वास के तहत नया घर और उसकी चाबी नहीं दी जाती, तब तक वे किसी भी हाल में अपने पुराने घर खाली नहीं करेंगे। करीब तीन घंटे तक यह विरोध प्रदर्शन चलता रहा। हालात को देखते हुए प्रशासन ने सख्ती का रुख अपनाने की तैयारी भी कर ली थी। भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले दागने तक की नौबत आ गई थी। 


प्रखंड विकास पदाधिकारी पप्पू रजक ने मोर्चा संभालते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन विस्थापित अपने मांगों पर अड़े रहे और पीछे हटने को तैयार नहीं थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंततः प्रशासन और सेल प्रबंधन को नरमी बरतनी पड़ी। अधिकारियों ने मौके पर ही विस्थापितों से वार्ता की और एक समाधान निकाला गया। प्रशासन की ओर से घोषणा की गई कि जिन लोगों को सेल प्रबंधन द्वारा बनाए गए नए घर की चाबी मिल चुकी है, वे तत्काल अपने पुराने घर खाली करें। वहीं, जिन विस्थापितों को अभी तक चाबी नहीं मिली है, उन्हें दो दिनों का समय दिया गया है। 


प्रशासन ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय के भीतर सभी को स्थल खाली करना होगा, ताकि यहां सेल का प्रस्तावित नया प्रोजेक्ट शुरू किया जा सके। इस आश्वासन के बाद विस्थापितों ने प्रशासन की बात मान ली। इसके बाद जिन लोगों को पहले ही चाबी मिल चुकी थी, वे धीरे-धीरे अपने घर खाली करने लगे। इस पूरी घटना ने एक बार फिर विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि इस तरह के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।



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