Guwa (Sandeep Gupta) बुधवार को किरीबुरू हिलटॉप स्थित गोपबंधू प्रतिमूर्ति स्थल पर उत्कल दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सेल के मुख्य महाप्रबंधक पी. एम. शिरपुरकर ने गोपबंधू प्रतिमूर्ति पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। बताया गया कि इस स्थल पर वर्ष 1968 से लगातार उत्कल दिवस का आयोजन किया जा रहा है।
उत्सव के दौरान वक्ताओं ने उत्कल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा भाषा के आधार पर एक स्वतंत्र प्रांत के रूप में स्थापित हुआ था। उस समय देश आजाद नहीं हुआ था, लेकिन ओडिशा के वीर योद्धाओं और जननायकों के संघर्ष के कारण अंग्रेजों को ओडिशा को अलग प्रांत का दर्जा देने के लिए बाध्य होना पड़ा। इससे पहले ओडिशा के क्षेत्र बिहार, बंगाल और मध्यप्रदेश में विभाजित थे।
कार्यक्रम में ओडिशा के महान वीरों और योगदानकर्ताओं को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। हिलटॉप स्थित ओड़िया स्कूल के बच्चों ने बंदे उत्कल जननी गीत प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। इस मौके पर मुख्य महाप्रबंधक पी. एम. शिरपुरकर के साथ मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) डी. मिश्रा, जीएम (विद्युत) नवीन संकाशुरे, जीएम (यांत्रिक) शुक्रा हो सहित कई गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे।
वहीं उत्कल दिवस पालन समिति की ओर से झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू के आवाह्नक राजेन्द्र सिंधिया, सचिव बादल राज, सदस्य रमाकांत परीडा, अरुण कुमार राउत राय, राजेश कुमार बेहेरा, रवि चंद्र नायक, देवाशीष कर, नरेश कुंवर, बसंत षड़ंगी तथा कोषाध्यक्ष डी. बिस्वाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।




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