Guwa (Sandeep Gupta) बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट में 108 साल बाद पहली बार मान्यता प्राप्त यूनियन के लिए चुनाव कराया गया। चुनाव में बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ (भारतीय मजदूर संघ) ने 62.29 प्रतिशत मत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। संघ के महामंत्री संजीत बनर्जी ने इसे मजदूरों की जीत बताया। जानकारी के अनुसार, 11 मार्च 1918 को इस्को स्टील प्लांट की स्थापना के बाद से लंबे समय तक मान्यता प्राप्त यूनियन के लिए चुनाव नहीं हुआ था।
इस दौरान इंटक को औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त यूनियन नहीं होने के बावजूद मान्यता प्राप्त यूनियन जैसी सुविधाएं और अधिकार मिलने का दावा किया गया। इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ ने 7 मई 2024 को लिखित शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत खारिज होने के बाद संघ ने 12 नवंबर 2024 को कोलकाता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले में सीटू, एचएमएस और एटक समेत अन्य यूनियन भी चुनाव रोकने की मांग को लेकर न्यायिक प्रक्रिया में शामिल हुईं। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने 25 फरवरी 2025 को चुनाव कराने का आदेश दिया।
बाद में 24 सितंबर 2025 को चुनाव पर रोक लगाने की मांग को लेकर फिर अदालत का रुख किया गया, लेकिन रोक नहीं लगी। इसके बाद एचएमएस और एटक ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की, जिसे खारिज किए जाने के बाद चुनाव का रास्ता साफ हुआ। चुनाव में कुल 3514 मतदाता थे, जिनमें से 3291 कर्मचारियों ने मतदान किया। बीएमएस को 2189, इंटक को 781, सीटू को 218, एटक को 33, एचएमएस को 31, एआईयूटीयूसी को 17 और आईएमयू को 17 वोट मिले। आठ मत अवैध रहे। बीएमएस के महामंत्री संजीत बनर्जी ने कहा कि यह जीत कर्मचारियों के विश्वास और मजदूरों की एकजुटता की जीत है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद यूनियन कर्मचारियों के हितों और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी ढंग से काम करेगी।



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