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Jamshedpur ‘ऊँची उड़ान — संपूर्णता की ओर’ राजयोग तपस्या शिविर का भव्य शुभारंभ, विभिन्न जगहों से एक हजार लोग शामिल ‘Flying High – Towards Perfection’ Rajyoga Tapasya Camp inaugurated with grand ceremony, one thousand people from different places participated

 


Jamshedpur (Nagendra) ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े नियमित राजयोग साधकों के लिए आयोजित दो दिवसीय ‘ऊँची उड़ान — संपूर्णता की ओर’ राजयोग तपस्या शिविर का शुभारंभ आज शनिवार को प्रातः साढ़े नौ बजे विधिवत रूप से हुआ। जमशेदपुर के लॉयला स्कूल ऑडिटोरियम, बेल्डीह ट्रायंगल, बिष्टुपुर में आयोजित इस विशेष शिविर में जमशेदपुर एवं आसपास के विभिन्न शहरों से लगभग एक हजार भाई-बहनों ने भाग लिया। शिविर में मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से पधारे वरिष्ठ राजयोगी एवं प्रखर वक्ता राजयोगी ब्रह्माकुमार सूरज भाई के सान्निध्य में कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। सूरज भाई जी चाणक्य अवॉर्ड सहित अनेक सरकारी एवं गैर-सरकारी सम्मानों से सम्मानित हैं। वे लेखक, गोल्ड मेडलिस्ट तथा लंबे समय से राजयोग के अनुभवी साधक एवं प्रशिक्षक रहे हैं। उनके साथ वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी एवं रोहित भाई जी भी विशेष रूप से पधारे हैं। तीनों ही राजयोग के अनुभवी प्रशिक्षक एवं प्रभावशाली वक्ता हैं।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं कैंडल लाइटिंग के साथ हुआ। इस अवसर पर महिला समाजसेवी पूरबी घोष , इंडस्ट्रियलिस्ट तरु बेन कमानी, मनोज कुमार, रीजनल मैनेजर एलआईसी, इंडस्ट्रियलिस्ट जितेंद्र अग्रवाल, आनंद सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। लॉयला स्कूल के फादर प्रिंसिपल ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके साथ ही जमशेदपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से वरिष्ठ राजयोग साधिकाएँ रागिनी दीदी, सुधा दीदी, पूनम दीदी, लक्ष्मी दीदी, उन्नति दीदी, रूबी दीदी, राजवंती बहन, शिवकन्या दीदी सहित अनेक वरिष्ठ बहनों की उपस्थिति रही। शिविर के प्रथम सत्र में सूरज भाई ने ‘स्वमान’ अर्थात Self Respect के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को स्वमान का अनुभव कराया। उन्होंने अनेक व्यावहारिक उदाहरणों एवं राजयोग अभ्यासों के माध्यम से बताया कि स्वयं को आत्मिक स्वरूप में पहचानना और सर्वशक्तिमान परमपिता परमात्मा की संतान होने का स्वमान रखना जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने विशेष रूप से अभ्यास कराया कि—“मैं सर्वशक्तिमान पिता की संतान हूँ, मैं मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ।”


इस संकल्प का चलते-फिरते, कार्य करते हुए निरंतर अभ्यास करने से व्यक्तित्व में सकारात्मक एवं ईश्वरीय ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि जब मन में शुभ संकल्पों की शक्ति बढ़ती है तो व्यक्ति अपने कल्याण के साथ-साथ दूसरों के कल्याण के लिए भी सकारात्मक कर्म करने की ओर अग्रसर होता है और जीवन की परिस्थितियों का सामना अधिक सहजता से कर पाता है।


इसके बाद गीता दीदी ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब किसी के व्यवहार से हमें दुःख होता है और हम उस घटना को बार-बार मन में दोहराते रहते हैं, तो उसका प्रभाव हमारी मानसिक शांति पर पड़ता है। नकारात्मक विचारों को पकड़े रहने के बजाय क्षमा का भाव अपनाने से मन हल्का होता है और सकारात्मकता का अनुभव होता है। उन्होंने कृतज्ञता को भी जीवन की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि परमात्मा ने हमें बहुत कुछ दिया है, लेकिन जब हम अपनी तुलना दूसरों की उपलब्धियों और परिस्थितियों से करने लगते हैं, तब हमें कमी का अनुभव होने लगता है। इसके स्थान पर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव रखने से संतोष एवं आंतरिक खुशी बढ़ती है। गीता दीदी ने प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का अनुभव भी कराया।


वहीं शाम के सत्र में ब्रह्माकुमारी अंजू दीदी ने दिनभर के सत्रों के सार के रूप में Self Checking अर्थात स्व-चेकिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से स्वयं की जाँच करने से हम अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर कर सकते हैं और अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपनी गलतियों से सीखता है और उन्हें दोहराने से बचता है, तो उसके सकारात्मक कर्मों का खाता बढ़ता है। उन्होंने इसे “इमोशनल बैंक अकाउंट” से जोड़ते हुए कहा कि अच्छे विचार, शुभ भावनाएँ और सकारात्मक कर्म इस खाते में निरंतर जमा होते रहते हैं। ऐसी आत्म-जाँच व्यक्ति को स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बनने में सहयोग करती है। इसके बाद आपा बहन ने प्रतिभागियों के लिए विभिन्न गतिविधियाँ कराईं। प्रतिभागियों को अपने जीवन के ऐसे अनुभव लिखने के लिए प्रेरित किया गया, जब उन्होंने किसी को क्षमा किया हो और उसके बाद मन हल्का हुआ हो तथा ध्यान एवं मेडिटेशन में सहजता का अनुभव हुआ हो। इसी प्रकार ऐसा अनुभव भी लिखने को कहा गया, जब अपनी किसी गलती को स्वीकार कर ‘सॉरी’ कहने के बाद मन में खुशी एवं हल्केपन का अनुभव हुआ हो।


संध्या सत्र में रोहित भाई जी ने परमात्मा के साथ का अनुभव करने की विधि पर प्रकाश डाला। इसके बाद सूरज भाई जी ने अपनी विशेष कॉमेंट्री के माध्यम से प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का गहन अभ्यास कराया। कार्यक्रम के समापन सत्र में गीता दीदी ने ईश्वरीय शांति एवं शुभकामनाओं की शक्ति का अनुभव कराया तथा प्रतिभागियों को मन के द्वारा दूसरों को शक्ति एवं शुभभावनाएँ देने का अभ्यास कराया। इस दो दिवसीय शिविर में जमशेदपुर के साथ-साथ गया, हजारीबाग, रामगढ़, पटना, मुजफ्फरपुर, देवघर, कोलकाता, रांची, चांडिल, बलरामपुर, देवरिया सहित विभिन्न स्थानों से लगभग एक हजार भाई-बहन भाग लेने पहुँचे हैं। ‘ऊँची उड़ान — संपूर्णता की ओर’ शिविर का उद्देश्य नियमित राजयोग साधकों को आत्मिक उन्नति, स्वमान, सकारात्मक चिंतन, क्षमा, कृतज्ञता, आत्म-चिंतन एवं परमात्म-स्मृति के माध्यम से अपने जीवन में संपूर्णता की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।


ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से इस विशेष आयोजन में सहभागी सभी भाई-बहनों, अतिथियों, समाजसेवियों एवं सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया तथा परमात्मा से सभी के जीवन में शांति, शक्ति, खुशी एवं सफलता की कामना की गई।



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