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Bhopal नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी: जिम्मेदार नेता या विवादों के केंद्र? Leader of the Opposition Rahul Gandhi: Responsible leader or centre of controversy?

 


Upgrade Jharkhand News. लोकसभा में चर्चा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हो रही है जिस पर राहुल गांधी एक शब्द नहीं बोल पाए। संसद के हर सत्र में कांग्रेस और राहुल गांधी ऐसा ही करते हैं। विषय से हटकर कुछ ऐसा सनसनीखेज बोलने का प्रयास करते हैं जिससे जनता में मोदी सरकार के प्रति विद्रोह और देश में नफरत पैदा हो और संसद को चलने नहीं देते। अफसोस यह है कि राहुल गांधी केवल कांग्रेस के नेता ही नहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उनकी जिम्मेदारी राष्ट्र के प्रति और भी ज्यादा हो जाती है । उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई बात बोलने से पहले उसके पूर्ण तथ्यों और गंभीरता के साथ बात करनी चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर विषय गलत ढंग से उठाने वाले राहुल गांधी यह भूल जाते हैं कि कांग्रेस की सरकार में ही चीन और पाकिस्तान ने देश की जमीन पर अतिक्रमण किया था। संसद में गलवान जैसे मुद्दे उठाकर कांग्रेस सत्ता पक्ष द्वारा जवाब में राष्ट्रीय सुरक्षा में अपने शासनकाल में होने वाली भूलों और कमियों की पोल खुद खुलवाती है। वास्तव में राहुल गांधी परिवारवाद से पीड़ित हैं, और अपने आपको संविधान से ऊपर समझने की उनकी भावना बहुत ही प्रबल है।


सुप्रीम कोर्ट में भारतीय सैनिकों की पिटाई के मामले में फटकार सुनने के बाद भी उनको समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या बोल रहे हैं ? गलवान में चीनी सैनिकों से झड़प में भी चीन का भारतीय सैनिकों से कई गुना सैनिकों का नुकसान हुआ था और राहुल गांधी कहते रहे कि चीन के सैनिक भारतीय सैनिकों को पीट कर चले गए। एक राष्ट्रीय नेता होने के नाते क्या भारतीय सैनिकों पर ऐसा बयान देना ठीक था ? मोदी को नीचा दिखाने के लिए आरोप लगाते लगाते राहुल गांधी सेना और सैनिकों को भी नीचे दिखाने लगे। वास्तव में राहुल गांधी के अंदर नेता प्रतिपक्ष होने की काबिलियत ही नहीं है। देश की जनता संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण देख रही है। जिसमें उन्होंने बार-बार लोकसभा स्पीकर के आदेश का उल्लंघन किया और हंगामा करके लोकसभा को स्थगित करा दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते एक जिम्मेदार नेता को ऐसा करने से बचना चाहिए।


संसद से बाहर आकर उन्होंने और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे जी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को संसद में बोलने नहीं दिया गया। हर बात में खरगे जी और राहुल गांधी आरएसएस को बीच में ले आते हैं। जिसका सरकार की कार्यवाही से कोई मतलब नहीं होता। यह सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वर्षों तक प्रचारक रहे हैं  और उनके मंत्रिमंडल में भी कई मंत्री आरएसएस के प्रचारक या सदस्य हैं। उनके अलावा भाजपा के कई मुख्यमंत्री भी आरएसएस के सदस्य या प्रचारक रहे हैं। क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुडा होना कोई अपराध है ? क्या संविधान संघ के स्वयं सेवकों को किसी भी प्रकार के सामाजिक या सक्रिय राजनीति में भाग लेने से रोकना है। उनका एकमात्र उद्देश्य किसी भी तरह मोदी सरकार पर उल्टे सीधे आरोप लगाकर देश की जनता में भ्रम पैदा करना है। क्या कांग्रेस और राहुल गांधी को संसदीय परंपराओं की जानकारी नहीं है जो वे अपनी राजनीति संसद में भी बाहुबली की तरह चलाना चाहते हैं।  (लेखक रक्षा मंत्रालय के पूर्व उपनिदेशक हैं) अतिवीर जैन "पराग



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